बचपन का खिलौना बना हकीकत:कानपुर की मैकेनिकल इंजीनियर अंशिका बनीं मिस यूपी फर्स्ट रनर-अप

शहर की एक और बेटी ने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर ग्लैमर की दुनिया में अपनी धाक जमाई है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुकीं अंशिका गुप्ता ने मिस उत्तर प्रदेश प्रतियोगिता में फर्स्ट रनर-अप का खिताब जीतकर कानपुर का मान बढ़ाया है। खास बात यह है कि अंशिका का यह सफर बचपन की एक पुरानी तस्वीर से शुरू हुआ था, जो आज हकीकत में बदल गया है। कानपुर जर्नलिस्ट क्लब में मीडिया से मुखातिब होते हुए अंशिका ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने परिवार और खासकर अपनी मां को दिया। उन्होंने बताया कि यह उनका पहला ब्यूटी पेजेंट था और पहली ही कोशिश में उन्हें यह बड़ी कामयाबी मिली है। तस्वीर में जो ताज था, आज वह सिर पर सजा अंशिका की सफलता की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी है। उन्होंने बताया कि जब वह छोटी थीं, तब एक फोटो स्टूडियो में उनकी मां ने मजाक-मजाक में उन्हें एक नकली ताज पहनाकर फोटो खिंचवाई थी। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि बचपन का वह खिलौना एक दिन असली क्राउन में बदल जाएगा। फिनाले के दौरान जब अंशिका रैंप पर वॉक कर रही थीं, तब उनकी मां दर्शकों के बीच बैठकर लगातार अपनी बेटी का हौसला बढ़ा रही थीं। अंशिका के

बचपन का खिलौना बना हकीकत:कानपुर की मैकेनिकल इंजीनियर अंशिका बनीं मिस यूपी फर्स्ट रनर-अप
शहर की एक और बेटी ने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर ग्लैमर की दुनिया में अपनी धाक जमाई है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुकीं अंशिका गुप्ता ने मिस उत्तर प्रदेश प्रतियोगिता में फर्स्ट रनर-अप का खिताब जीतकर कानपुर का मान बढ़ाया है। खास बात यह है कि अंशिका का यह सफर बचपन की एक पुरानी तस्वीर से शुरू हुआ था, जो आज हकीकत में बदल गया है। कानपुर जर्नलिस्ट क्लब में मीडिया से मुखातिब होते हुए अंशिका ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने परिवार और खासकर अपनी मां को दिया। उन्होंने बताया कि यह उनका पहला ब्यूटी पेजेंट था और पहली ही कोशिश में उन्हें यह बड़ी कामयाबी मिली है। तस्वीर में जो ताज था, आज वह सिर पर सजा अंशिका की सफलता की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी है। उन्होंने बताया कि जब वह छोटी थीं, तब एक फोटो स्टूडियो में उनकी मां ने मजाक-मजाक में उन्हें एक नकली ताज पहनाकर फोटो खिंचवाई थी। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि बचपन का वह खिलौना एक दिन असली क्राउन में बदल जाएगा। फिनाले के दौरान जब अंशिका रैंप पर वॉक कर रही थीं, तब उनकी मां दर्शकों के बीच बैठकर लगातार अपनी बेटी का हौसला बढ़ा रही थीं। अंशिका के मुताबिक, रनर-अप का यह ताज उनके लिए जीत से बढ़कर है क्योंकि इसने उनकी मां के सपने को पूरा किया है। ऑडिशन से फिनाले तक का सफर इस मुकाम तक पहुंचना अंशिका के लिए आसान नहीं था। फॉरएवर स्टार इंडिया की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता के ऑडिशन में करीब 40 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। इंट्रोडक्शन राउंड पार करने के बाद उन्हें अगले राउंड के लिए चुना गया। इसके बाद एक सप्ताह तक चले कड़े ग्रूमिंग सेशन में उन्हें रैंप वॉक, स्टेज प्रेजेंस और बातचीत करने के तरीकों (कम्युनिकेशन स्किल) की ट्रेनिंग दी गई। अपनी प्रतिभा के दम पर उन्होंने पहले 'मिस कानपुर नगर' का खिताब जीता और फिर 'मिस यूपी' के ग्रैंड फिनाले में फर्स्ट रनर-अप की ट्रॉफी हासिल की। अंशिका ने अपनी शुरुआती शिक्षा कानपुर के डॉ. वीरेन्द्र स्वरूप एजुकेशन सेंटर से पूरी की है। इसके बाद उन्होंने वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री ली। इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी क्षेत्र से होने के बावजूद उन्होंने अपने पैशन को चुना। अंशिका का कहना है कि वे अब मिस इंडिया और भविष्य में मिस यूनिवर्स के मंच तक पहुँचकर देश का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं। अंशिका अपनी इस उपलब्धि के जरिए समाज की अन्य बेटियों को भी प्रेरित करना चाहती हैं। उनका मानना है कि हर लड़की को बड़े सपने देखने चाहिए और उन्हें पूरा करने के लिए जरूरी आत्मविश्वास और साहस जुटाना चाहिए।

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